आसमान में खींचिये , इतनी भव्य लकीर ।
बस तुझसे ही पूछ कर, खुदा लिखे तक़दीर ।।होरी ।।
वरिष्ठ साहित्यकार , प्रखर वक़्ता , पूर्व प्रशासनिक अधिकारी , समाजसेवी और राष्ट्रीय अध्यक्ष - बदलता भारत श्री राजकुमार सचान होरी द्वारा संचालित
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Tuesday, 8 March 2016
महत्वाकांक्षा
महत्वाकांक्षा को फलने फूलने दीजिये और दिन में सपने देखिये । चल पड़िये उस राह पर फिर जिसे गीता में निष्काम कर्मयोग कहा गया है । देखियेगा एक दिन आप होंगे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की क़तार में ।
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